मोदी के सामने होंगी चुनौतियां

मोदी के सामने होंगी चुनौतियां

लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद एक और कार्यकाल हासिल करने वाले प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष इस बार विदेशी नीति के मामले में एक नहीं ढेरों चुनौतियां ( Difficulties of Modi)होंगी। मोदी वैश्विक मंच पर शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे हैं। यह एक बेहतरीन अवसर है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद एक और कार्यकाल हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष इस बार विदेशी नीति के मामले में एक नहीं ढेरों चुनौतियां होंगी। प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता संभालने के तुरंत बाद अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी ट्रेड वॉर के अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में संतुलन साधना होगा। खासतौर पर ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंध भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती होंगे क्योंकि ईरान हमेशा से भारत के लिए सस्ते तेल का स्रोत रहा है। दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत अपनी जरूरत का 70 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है। फिलहाल भारत ने अमेरिका के दबाव में वेनेजुएला और ईरान से भी तेल की खरीद बंद कर दी है। इससे पहले अमेरिका ने भारत सरकार को ईरान से तेल खरीदने के लिए एक मई तक की छूट दी थी, लेकिन यह अब समाप्त हो गई है।

छूट खत्म होने के बाद अब भारत को ईरान को छोड़कर सऊदी अरब से तेल खरीद बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ईरान से हुए करार के बाद भारत तेल खरीद का पैसा रुपए में चुका रहा था, पर सऊदी अरब से कच्च तेल खरीदने के लिए रिफाइनर्स को डॉलर में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। अब ऐसी स्थिति में यदि मध्य पूर्व के देशों में जरा भी तनाव भड़कता है तो फिर कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। इससे भारत में डीजल और पेट्रोल तो महंगा होने के अलावा अन्य चीजों की महंगाई भी बढ़ जाएगी। इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है। यही नहीं खाड़ी के देशों में किसी भी तरह की अस्थिरता वहां रह रहे 70 लाख भारतीयों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। भारत के लिए यह बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण स्थिति होगी। इसके अलावा भारत को दुनिया के समक्ष खुद को जिम्मेदार देश के तौर पर भी पेश करना होगा। वैश्विक नेताओं का मानना है कि भारत को दुनिया में अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ानी चाहिए। इसके अलावा भारत को अपने बाजार को खोलने और क्लाइमेट चेंज की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी के पास जिस रूप में सत्ता आई है, उससे उनकी चुनौती बढ़ गई है। घर में भी मोदी की साख बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी छवि मजबूत हुई है। पिछले कार्यकाल में मोदी ने पूरी दुनिया के सामने भारत का जिस तरह का एजेंडा सामने रखा था, उसकी कई देशों ने सराहना की थी। अब इस कार्यकाल में एजेंडे को मूर्तरूप देना प्रधानमंत्री मोदी के लिए सबसे बड़ा काम होगा। भारत की छवि को मोदी ने जिस तरह से दुनिया के सामने रखा है, उसमें और ज्यादा निखार लाना होगा। देश की जनता ने मोदी को आगे बढ़ते रहने का जनादेश दिया है। अब देखना है कि वे वैश्विक पटल पर भारत को क्या हासिल करा पाते हैं।